बांस का गरीब कलाकार

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“भोले शंकर,” शायद यही वे शब्द थे जो मैंने उसके मुँह से पहली बार सुने होंगे। सांवला रंग, साढ़े 5 फ़ीट कद, चेहरे पर चेचक के निशान और गठीला कद, उसे किसी भी दृष्टि से भयावह बनाता था और बच्चे तो उसे देखते ही छुपने की जगह ढूंढते थे पर उसकी आँखों में कुछ था; […]

हम अब भी ग़ुलाम हैं?

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अब जबकि स्वतंत्रता दिवस आने वाला है तो दो दिन के देशभक्त भी बरसाती मेंढकों की तरह बाहर आ गये होंगे। ट्रैफिक सिग्नल पर तिरंगे में रंगी चीजों की खरीदारी भी शुरू हो गयी होगी। कार के डैशबोर्ड से ऑफिस के वर्कस्टेशन तक तिरंगे में लिप्त हमारी खोखली देशभक्ति अपने होने की झूठी गवाही भी […]