सोचता हूँ जमीन नहीं पेट्रोल खरीदूँ…

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बात यह भी तो कल की है
पेट्रोल की बढ़ती कीमत ने मुश्किल की है.
इसलिए सोचता हूँ मैं आजकल,
इस समस्या का निकालता हूँ इक अनोखा हल.
लेकर बैंक से बड़ा सा लोन,
जमीन नहीं मैं खरीदूं ढेर सारा पेट्रोल.
जब मैंने यह पिताजी को बताया,
जोर का हाथ एक मुझ पर घुमाया.
बोले, मूर्ख क्या बकता है?
पेट्रोल जमा कर कभी पैसा बचता है?
मैं बोला, मेरे भोले पापा,
कांग्रेस के राज का है यह सारा स्यापा.
जमीन की कीमत बढ़े न बढ़े,
पर पेट्रोल तो अब बस ऊपर ही चढ़े.
कांग्रेस राज में ये आठ बार बढ़ा है,
और अभी उनका कार्यकाल और भी पड़ा है.
पापा खुश होकर बोले, सोचता हूँ बेटे,
मेरे PF के पैसे से भी क्यों ना पेट्रोल ही ले लेते.

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