मूवी रिव्यू: नूर – देखी जा सकती है

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कलाकार: सोनाक्षी सिन्हा, कनन गिल, पूरब कोहली, स्मिता ताम्बे
डायरेक्टर: सुनहिल सिन्हा
समय: 1 घंटा 56 मिनट
स्टार रेटिंग: 3 स्टार्स

नूर की कहानी – नूर कहानी है एक महत्वाकांक्षी जर्नलिस्ट की जो सामजिक मुद्दों पर बात करना चाहती है पर अफ़सोस उसके खुद के मुद्दे अभी सुलझे नहीं हैं। अपनी अस्त व्यस्त लव लाइफ, डावाडोल करियर और रोजमर्या की समस्याओं के बीच अंतत उसे एक ठोस कहानी मिल ही जाती है।  नूर एक ऐसी लड़की है जो RUM में रमी हुयी है, बिस्तर पर पैनकेक खाती है और फिर मोटे होने के बुरे सपने देखती है। इस तरह से अपनी ही समस्याओं से जूझते हुए एक दिन नूर की ज़िन्दगी में एक तीखा मोड़ आता है जब उसकी नौकरानी उसे अंगों के अवैध धंधे से रूबरू कराती है।

डायरेक्टर सुनील सिप्पी ने नूर में जर्नलिज्म को स्टीरिओटाइप नहीं किया है और नूर को एक आम लड़की के रूप में दिखाया है जो अपनी ही समस्याओं से जूझती नज़र आती है। पात्रों को दर्शाने में डायरेक्टर मुख्यता सफल रहे हैं, जो कि आज की जेनेरशन के हिसाब से तर्कसंगत हैं और बोर या अविश्वसनीय नहीं दिखते। हालांकि फिल्म की अपने कुछ खामियां भी हैं। नूर एक सीरियस और सही मुद्दे को उठाती तो है पर उससे लड़ने या दूर करने के तरीके कन्विंसिंग प्रतीत नहीं होते।

इसके साथ कहीं कहीं लेखक की कलम भी कमज़ोर पड़ जाती है जिसकी वजह से दर्शक अपना इंटरस्ट खोते प्रतीत होते हैं। फिल्म की लीड के रूप में सोनाक्षी सिन्हा अच्छा काम किया है हालांकि कंटेंट में थोड़ा सुधार किया जा सकता है। पर फिर भी इसे सोनाक्षी सिन्हा की बेहरतीन फिल्म माना जा सकता है। इसके अलावा सह कलाकारों ने भी अच्छा काम किया है। कुल मिलाकर फिल्म देखने योग्य है और अपनी जनरेशन की बहुत सारी फिल्मों से सशक्त और प्रभावपूर्ण है।

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