क्या रेप के ख़िलाफ़ कड़े कानून बनाना इतना मुश्किल है?

ये एक ऐसा प्रश्न है जो कम से कम आम आदमी के जहन को तो ज़रूर टटोलता होगा कि रेप की बढ़ती वारदातों के बाद भी कानून लाचार और लचर क्यों है। तो इस विषय थोड़ी रिसर्च करने पर कुछ दो-तीन संभावित कारणों पर आकर मेरी सुई रुकी। चलिए हम और आप मिलकर इन कारणों पर थोड़ी चर्चा कर लें।

Image Courtesy: Time.com

प्रभावी वर्ग की संलिप्तता

अगर मैं कठुआ और उन्नाओ जैसे ज्वलंत मामलों की बात करूँ तो इनमें अभियोगी पक्ष काफी रसूखदार और प्रभावी है जिसके चलते सबूतों को मिटाना और मामलों को दबाने जैसे प्रयास किये जाते हैं। जैसे कि पूर्व में देखा गया इस तरह मामलों में जब तक जनता और मीडिया ने दबाब नहीं डाला है अभियुक्त को मुनासिब सज़ा नहीं मिल पायी है। और शायद यही वज़ह हैं सरकार, जिसपर इन रसूख वाले लोगों का परोक्ष या अपरोक्ष दखल होती, इस तरह के कड़े कानून बनाने में कोताही बरतती आयी है।

झूठे आरोपों की सम्भावना

कुछ मामलों में, विशेष तौर पर प्रेम विवाह, बदला और पैसे या प्रॉपर्टी के लालच, रेप के झूठे आरोप भी लगाए जाते हैं जिनके चलते कई बार बेगुनाह भी कानून के चपेट में आ जाते हैं। हालांकि, ऐसे मामलों की प्रतिशत बहुत कम है परन्तु फिर भी ये एक कारण हो सकता है रेप के दोषियों को सजा देने में जल्दबाज़ी ना बरतने का।

राजनीतिक रोटियां सेंकना

राजनीति में मुद्दों को सुलझाने से ज्यादा उन्हें उलझाने का प्रयास ज्यादा होता है। सरकार को शायद कुछ पैसे भीख में देना कड़े कानून बनाने से ज्यादा आसान और फायदेमंद लगता है। अभी हाल ही घटनाओं को ले लें तो राहुल गाँधी अपने परिवार को लेकर कैंडल मार्च पर निकल पड़े तो सत्तापक्ष ने उसके बदले में गड़े मुर्दे उखाड़ने शुरू कर दिए और इस कश्मकश में लोग मुद्दा भूलकर उनकी तू-तू मैं-मैं में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे, जो कि उनका मक़सद भी था।

अगर मुझसे पूछें तो मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार अगर चाहे तो इन जघन्य अपराधों को अगर खत्म नहीं कर सकती तो नियंत्रित ज़रूर कर सकती है। आप इन घिनौने लोगों का हौंसला देखिये। एक तरफ पूरा देश इन दो अमानवीय अत्याचारों के प्रति एकजुट है और कुछ दरिंदे इस बीच भी इन घिनौने अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। और वो ऐसा करने का साहस जुटा पाते हैं क्यूंकि उन्हें कोई डर नहीं हैं।

कहते हैं हनुमान जी कभी कभी अपनी शक्ति भूल जाया करते थे और फिर उन्हें याद दिलाया जाता था कि वे क्या करने में सक्षम हैं।

आओ हम भी कोशिश करें कि सरकार को भी अपनी शक्ति का एहसास हो और वह इसका उपयोग कर हमारी मासूम बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

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